मुन्ना चाट वाला काका किधर गए? कविता -PANI PURI , । Bachpan ki best kavita
कविता: मुन्ना चाट वाला काका किधर गए?
Bachpan ki best kavita
अरे राजू,
अपना वो मुन्ना चाट वाला काका किधर गए?
जो थाली में चटनी, पकोड़ी और आलू टिक्की सजाए —
तेरी हर फरमाइश पर तीखा-मीठा मिलाए।
जिनके ठेले से दूर तक खुशबू उड़ती थी,
और चार गली छोड़ के भीड़ खुद चलती थी।
हर छुट्टी में जिनकी दुकान पे जुलूस लगता था,
जिसका तीखा पानी सबकी नाक बहा देता था!
अरे राजू, तू तो सबसे ज़्यादा चिल्लाता था —
“काका! थोड़ा extra दही डाल दो ना यार।”
और वो हँसते हुए कहते,
“बेडवा छोरे, फिर मत बोलना ज़ोर से लगे सरकार!”
अब ना वो ठेला है, ना वो काका की मुस्कान,
बस बचपन की यादें हैं, और हल्की-सी पहचान।
कहीं शहर ने लील तो नहीं लिया वो स्वाद?
या वक़्त की धूल में खो गया उनका अंदाज़?
अरे राजू, अगर कभी दिखें वो काका दोबारा,
तो कहना —
"हम आज भी तुम्हारे हाथों की चाट मिस करते हैं,
और वो मुन्ना अंदाज़... अब कहीं नहीं मिलते हैं।"
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