बारहखड़ी की किताब WALI कविता । Bachpan ki best kavita PADHE DIL KO CHHOO LENE WALI HINDI ME
कविता: बारहखड़ी की किताब
अरे राजू,
अपनी बारहखड़ी की किताब किधर गई?
वो जो ‘क’ से ‘का’, ‘कि’, ‘कु’, ‘के’ सिखाती थी,
जिसमें माँ की ऊँगली पकड़कर अक्षर चलाते थे।
याद है तुझे,
उस किताब के पन्ने आधे फटे होते थे,
पर हर पन्ना जैसे नया जहाँ दिखाता था —
‘ग से गमला’, ‘घ से घर’, ‘च से चम्मच’ का संसार बसाता था।
कभी-कभी आखिरी पन्ने पर मास्टर जी का डंडा भी दिखता था,
क्योंकि ‘ठ से ठेला’ हम हमेशा भूल जाते थे।
और फिर तेरा वही बहाना —
“किताब गुम हो गई गुरु जी, कल ढूंढ लाऊंगा…”
अरे राजू,
अब ना वो किताबें हैं, ना वो टाट-पट्टी का ज़माना,
अब तो मोबाइल में ABCD है,
पर उस ‘अ-अ:’ में जो संस्कार था, वो कहाँ है?
अगर कहीं मिल जाए वो किताब,
तो उसका आखिरी पन्ना पलटकर देखूँगा —
शायद उसमें अब भी तुम्हारा नाम लिखा हो
और मेरी पहली लिखी ‘माँ’ भी मुस्कुरा रही हो।
📚✨
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