"मैं हूं ट्रैफिक का सिंघम कविता -BEST TRAFFIC MAN । Deshbhakti Kavita
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"मैं हूं ट्रैफिक का सिंघम!" Deshbhakti Kavita
(फनी कविता – ट्रैफिक हवलदार की जुबानी)
मैं हूं ट्रैफिक का सिंघम, मेरा रुतबा सबसे भारी,
सिर्फ हाथ उठाऊं… तो रुक जाती है दुनिया सारी! 😎
सीटी मेरी व्हिसल नहीं, सीधा बुलावा है धरतीराज का,
और चालान मेरी जेब में नहीं — सीधा प्रिंटर से छपता है आज का!
हेलमेट नहीं? चल बेटा… चालान कटेगा,
तीन सवारी? तो बोनस में मीठा गुस्सा मिलेगा!
फोन पे बात करते पकड़े गए?
समझ लो अब फोन का बिछड़ना तय है रे भाई रे! 📱💔
बत्ती लाल हो या ग्रीन —
मुझे देख के सबका रंग हो जाता है सीधा क्रीम!
गर्मी में मैं पसीना पोंछूं, सर्दी में कांपू,
फिर भी हर गाड़ी वाले का बहाना मैं चांपू!
"साहब जल्दी में हूं, इंटरव्यू है",
"साहब बीवी हॉस्पिटल में है"
भाई… बीवी रोज़ बिमार लगती है,
और तुम हमेशा इंटरव्यू के स्टार लगते हो! 😆
बच्चे मुझे देखकर कहते हैं – "पापा हेलमेट पहनो",
बीवियां कहती हैं – "चालान न कटवाओ, घर चलो!"
मैं हूं वो जो ना पुलिस थाना, ना कोर्ट से डरता,
बस ट्रैफिक संभालते-सम्भालते दिल से हँसता और मरता!
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