तू हिमालय से भी बड़ा है | Army Man । Deshbhakti Kavita, | Sipahi Poem in Hindi
पढ़िए प्रेरणादायक देशभक्ति कविता "तू हिमालय से भी बड़ा है", जो हमारे वीर सैनिक (Army Man, Sipahi) की शौर्य गाथा और त्याग को समर्पित है। यह कविता हर भारतीय के दिल में जोश और गर्व भर देती है। " सीना ताने खड़ा है" Deshbhakti Kavita तू हिमालय से भी बड़ा है क्योंकि तू सरहद पर सीना लगाकर खड़ा है। जहाँ दुश्मन का साया भी डर से कांपता है, तू वहीं पर शेर बनकर डटा है, खड़ा है। ना दिन की फिक्र, ना रात का ग़िला है, तेरे लिए तो हर पल वतन ही खुदा है। गोलियों की बौछार भी तुझसे डरा है, क्योंकि तू आग में भी मुस्कुरा कर खड़ा है। तेरी वर्दी में लिपटी है देश की आस, हर कतरा तेरा हमें देता है विश्वास। जब तू चला तो ज़मीन भी हिला है, ऐसा जवान ही तो असल में बड़ा है। तेरी हिम्मत से हर डर भी डरा है, तेरी वीरता ने दुश्मन को घेरा है। तेरे कदमों से हर राह सवेरा है, तेरे साहस से हर दिल में भरोसा है। तेरी मेहनत में ही वतन का बसेरा है, तेरी शौर्यगाथा हर जवान को हरा है। तेरी ताक़त से ही सीमा खड़ा है, तेरी क़समें वतन को फिर से सजा है। तू जवान नहीं, तू सपूतों का सच्चा है, तेरी वर्दी में बंधा हर सपना...