मुम्बई पुलिस Man की कविता शायरी । Deshbhakti Kavita
पुलिस मैंन हूं मैं Deshbhakti Kavita
पुलिस मैंन हूं मैं
पुलिस मैंन हूं मैं
गनमैन हूं मैं
मुंबईचे मी पोलिसमॅन आहे!
ला ला ला...ला ला ला...
कड़क मॅन हूं
मैं स्ट्रॉंग मॅन हूं
मेटल मैंन हूं मैं
आन बान हूं मैं
पुलिस कमान हूं मैं
हाई कमान हूं मैं
मुंबई चे मैं पोलिस मॅन हूं!
ला ला ला...ला ला ला...
दिन हो या रात
मैं हूं ड्यूटी पर साथ
मुसीबत में जो फंसे
उसे निकालूं हर बार
सीटी बजती है
गाड़ी दौड़ती है
गुंडों की सांसें
बस थम सी जाती हैं!
चोर हो या गुंडा, सबकी खबर हूं
मुंबई के दिल में, मैं ही असर हूं
सड़क पे तेज़ रफ्तार – मैं रोकूं
भीड़ में कोई खतरा – मैं टोको
बिना वजह हंगामा? – मैं छांटूं
कानून की किताब हूं – मैं ही पाठ हूं
ला ला ला...ला ला ला...
वर्दी मेरी पहचान है
सैल्यूट में छुपी जान है
माँ की दुआ, मुल्क की शान
मेरे हर कदम में बस इमान है
पुलिस मॅन हूं मैं – ओ रे भाई!
मुंबईचे मी पोलिसमॅन आहे!
ला ला ला... कड़क मॅन हूं मैं!
सत्याचा मी दरबार आहे!
पुलिस मैंन हूं मैं
पुलिस मैंन हूं मैं
मुंबईचे मी पोलिसमॅन आहे!
ला ला ला...
राकेश प्रजापति
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