DIGITAL"मेट्रो की धड़कनें मोबाइल की स्क्रीन पर” कविता पढ़ें हिंदी में

DIGITAL METRO IMAGE IN INDIA



मेट्रो – एक मोबाइल से कम नहीं
              __राकेश प्रजापति 

मेट्रो एक मोबाइल से कम नहीं,
हर स्टेशन पर नेटवर्क की घंटी बजी,
Wi-Fi हो या GPS की लाइन,
हर कोना है डिजिटल, सबकुछ है फाइन।

दरवाज़ा अपने आप खुले,
बिना कहे ‘डिंग’ बोले,
सामने स्क्रीन पर सब लिखा आता है,
कहाँ उतरना है, कौन सा स्टेशन आता है।

कोई इंस्टा पे Reels बना रहा,
कोई Netflix पे वेब चल रहा।
कोई ब्लूटूथ से गाने सुनता,
तो कोई WhatsApp पर status चुनता।

सीट भी जैसे फोन की चार्जिंग,
किसी को मिलती, किसी को है लाचारी।
Standing mode में सब लोग सेट,
जैसे Mobile में चालू हो कोई Applet।

साथ बैठे फिर भी दूर सभी,
जैसे नेटवर्क है, पर range नहीं।
बातें कम, स्क्रीन ज़्यादा चमकती हैं,
सवाल भी अब emoji में ढलकती हैं।

मेट्रो में Time भी fast-forward है,
जैसे मोबाइल में Swipe Left-Right है।
ना धक्का, ना रिक्शे की fight है,
बस एक app से टिकट बुक — What a delight है!

कह दो साफ-साफ दुनिया से कहीं —
आज की मेट्रो, मोबाइल से कम नहीं! 📱🚇

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