इंसान को बेटा चाहिए, लड़की नहीं क्यों? BEST शायरी KAVITA PADHE
इंसान को बेटा चाहिए, लड़की नहीं क्यों?"
✍️ – राकेश प्रजापति
हर इंसान को बेटा चाहिए,
लड़की नहीं… क्यों?
क्या बेटी जनम लेने से पहले ही
उसका दोष तय हो जाता है?
माँ की कोख में जब हल्की सी हरकत होती है,
तो कोई कहता है — "शायद लड़का होगा!"
और जब पता चले कि लड़की है…
तो चेहरे सन्न हो जाते हैं,
जैसे मौत की कोई ख़बर आई हो।
कभी उस कोख से पूछो
जिसने बेटी को नौ महीने सहेजा था,
और अब उसी की धड़कनों पर
"अबॉर्शन" का फैसला हो रहा है...
कभी उस माँ से पूछो
जो बेटी का नाम सोचकर
लोरी गुनगुनाती थी रातों को,
और अब तकिए भीगते हैं
उसकी अधूरी लोरियों से।
बेटी — जो बड़ी होकर
अपने बाप का सहारा बनती है,
जो माँ की चुप्पियों को समझती है,
जो भाइयों के झगड़े में भी
घर की शांति बनकर खड़ी रहती है।
फिर भी हर बार यही सवाल —
“लड़की है?”
और उत्तर में गहरी चुप्पी,
जैसे कोई जुर्म हो गया हो।
क्या बेटी वो नहीं,
जो दहेज़ में सपने छोड़ आती है?
जो विदाई के वक़्त
हँसते हुए भी रो जाती है?
बेटा कब माँ-बाप के पाँव धोता है?
पर बेटी…
वो तो आखिरी समय में भी
बुज़ुर्गों के सिरहाने बैठी मिलती है।
तो फिर ये सवाल क्यों?
हर इंसान को बेटा चाहिए,
लड़की नहीं… क्यों?
शायद इसलिए…
क्योंकि इंसान ने अभी
माँ की ममता, बहन की मोहब्बत,
और बेटी की परछाई को
महसूस करना सीखा ही नहीं...
आपका
राकेश प्रजापति
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