भोले का कावड़ी नहीं बनेगा,तो सच मान, अनाड़ी बनेगा। कविता पढ़ें
"भोले का कावड़ी नहीं बनेगा,
तो सच मान, अनाड़ी बनेगा।
✍️ राकेश प्रजापति
भोले का कावड़ी नहीं बनेगा,
तो सच मान, अनाड़ी बनेगा।
सावन में जल नहीं चढ़ाएगा,
तो अगले जनम में फिर कबाड़ी बनेगा।
भक्ति का भी नियम समझ ले तू,
सिर्फ ढोल बजा कर कुछ ना होगा।
पढ़ ले, बढ़ ले इस जीवन में,
बाबा का आशीर्वाद तभी साथ होगा।
तू पढ़, तू बढ़ – यही भोले की मर्जी है,
ज्ञान ही असली पूजा, यही सबसे सच्ची अर्जी है।
जो मंदिर के साथ किताब को पकड़ेगा,
वो ही जीवन में ऊपर चढ़ेगा।
कांवर भी उठा, कलम भी थाम,
सच्ची मेहनत से बन जाएगा तेरा नाम।
भोले का नाम ले, पर आलस ना कर,
पढ़ाई से ही खुलेगा सफलता का दर।
ना मिर्गी नाच, ना झूठी ताली,
भोले की भक्ति है सच्चाई वाली।
पढ़ाई में जो भी आगे रहेगा,
बाबा का आशीर्वाद उसमें बहता रहेगा।
तो उठ, जाग, कलम को पकड़,
भोले के नाम पे अब सपने सँवर।
भक्ति भी कर, मेहनत भी कर,
तू ही चमकेगा, तेरा ही नंबर।
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