BALOON WALE कालू चाचा किधर गए । Bachpan ki best kavita कविता PADHE HINDI ME
कालू चाचा किधर गए BALOON WALE
Bachpan ki best kavita
अरे राजू,
अपना गुब्बारे वाला कालू चाचा किधर गए, नज़र नहीं आए?
जो हर मेले में एक बाँस की लकड़ी पर
रंग-बिरंगे सपने टाँग लाते थे।
जिनकी आवाज़ दूर से गूंजती थी —
“गुब्बारे ले लो, गुब्बारे!”
और तू दौड़ पड़ता था,
एक हरे वाले गुब्बारे के लिए सौ बार मोल-भाव करता था।
उनकी जेब में सीटी होती थी,
और एक पॉलिथीन में गुल्लक,
तेरे रोने पर वो मुफ़्त में गुब्बारा पकड़ा देते थे,
बोलते — “चल, अगले साल तू पैसा दे देना।”
अब ना वो कालू चाचा दिखते हैं,
ना वो मेले की भीड़ में उनकी आवाज़,
बस ऑनलाइन टॉयज का नोटिफिकेशन आता है,
पर वो मासूम मोलभाव कहाँ? वो बचपन की मिठास कहाँ?
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