अपना बचपन वाला "गिल्ली डंडा किधर रखा है रे" । GULLI DANDDA । Bachpan ki best kavita पढ़ें हिंदी में

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GULLI DANDDA KAVITA PADHE HINDI ME

गिल्ली डंडा किधर रखा है रे-Bachpan ki best kavita


अरे राजू!
अपना बचपन वाला गिल्ली डंडा किधर रखा है रे?
वही — जो बाबूजी ने खुद छील के बनाया था,
और तू उसे भगवान की तरह संभालता था!

याद है...?
हर इतवार को कुएं के पास खेलते थे,
और तू जीतने के बाद उसे चूम के जेब में रखता था —
जैसे कोई ताज पहन लिया हो राजा ने!

कहीं वो मिट्टी के ढेले में गड़ गया होगा,
या फिर बक्से के नीचे पड़े पुराने बस्ते के साथ सो गया होगा?

चल ना राजू,
आज फिर ढूंढते हैं वो गिल्ली डंडा,
शायद बचपन भी साथ मिल जाए...
वो पेड़, वो धूल, वो हंसी की चोटियां —
जहां उम्र हार जाती थी, और हम जीत जाते थे।

🌾🏏
गिल्ली डंडा नहीं मिला तो क्या,
पर वो बचपन की यादें अब भी वहीं रखी हैं... दिल के कोने में।

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