लट्टू और टूटती रस्सी WALI KAVITA PADHE । Bachpan ki best kavita
BACHPAN KI ACHHI WALI KAVITA PADHE HINDI ME
लट्टू और टूटती रस्सी Bachpan ki best kavita
_राकेश प्रजापति
अरे राजू,
अपना लट्टू किधर गया?
वो जो तू रस्सी लपेट के
जमीन पर छोड़ता था –
और दुनिया गोल-गोल नाचने लगती थी।
याद है, कैसे हम मैदान में
घंटों अपने लट्टू की चाल दिखाते थे?
कभी सीधा, कभी तिरछा,
कभी उछलता, कभी टिक-टिक घूमता…
अब तो ये रस्सी भी टूट चुकी है,
ना वो पकड़ रही,
ना लट्टू घूम रहा।
शायद हमारी उम्र की रस्सी भी
धीरे-धीरे ढीली पड़ गई है,
जिसे कसना अब
सम्भव नहीं लगता।
वो लट्टू सिर्फ खिलौना नहीं था राजू,
वो हमारी ज़िंदगी का ट्रायल रन था —
जिसमें गिरना, उठना,
और फिर खुद-ब-खुद घूमना सिखाया गया था।
अब अगर मिल जाए वो पुराना लट्टू,
तो चाहूंगा कि एक बार फिर
उसे ज़ोर से घुमा दूं —
और देखूं कि क्या बचपन अब भी लौटता है?
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