पढ़ें शानदार और जमीन से जुड़ी कविता "मुंबई का मोची "हिंदी में
मुंबई का मोची
चप्पलों की मरम्मत करते हुए,
वो हर जोड़ी में पढ़ लेता है ज़िंदगी।
सिली हुई पट्टियों के पीछे,
कितनी टूटी उम्मीदें सिल चुका है वो।
फुटपाथ पर बैठा,
न शाम का शिकवा, न सुबह की शिकायत।
मुंबई के शोर में दबा उसका नाम,
पर काम ऐसा कि हर कोई पूछे —
"भाई, जूता बन जाएगा?"
धूप हो या बारिश की बाढ़,
एक नीली तिरपाल ही उसका ऑफिस है।
जहाँ न एसी है, न कुर्सी,
पर हर ग्राहक को देता है फ़िनिशिंग टच।
उसके पास कोई मोबाइल ऐप नहीं,
न QR कोड, न इंस्टा पेज।
फिर भी हर मोहल्ला जानता है उसे —
मुंबई का मोची।
कभी एक सेल्समैन की सोल सिली,
कभी किसी दुल्हे की शादी की चप्पल।
उसकी उंगलियाँ कहानी कहती हैं —
घिसे हुए चमड़े से बने कुछ सपनों की।
एक जोड़ी जूते की मरम्मत के पीछे,
छुपा है उसका किराया,
एक टाइम की चाय,
और शायद स्कूल की फीस भी।
कभी-कभी वह खुद भी सोचता है —
"मेरे अपने जूते तो पुराने हैं,
पर मैं रोज़ औरों को नये रास्ते देता हूँ।"
मुंबई का मोची
न कोई सेल्फी लेता है उसके साथ,
न कोई पोस्ट करता है —
#LocalHero
पर वो है —
इस शहर का असली कारीगर।
नोट:अगर पसंद आए तो comment लिखें और दोस्तों को शेयर करें

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें