माँ का ताबीज" । MAA KA TABEEZ कविता PADHE DIL KO CHHOO LENE WALI
MAA KA TABEEZ KAVITA PADHE
माँ का ताबीज"
✍️ राकेश प्रजापति
जब कभी मुसीबत में रहना,
तो माँ को याद कर लेना,
उसके आँचल से बाँधा हुआ
वो छोटा सा ताबीज टटोल लेना।
वो कोई धागा नहीं,
वो माँ की रातों की जागी दुआ है,
जो हर बला को
दरवाज़े से पहले रोक लेती है।
जिस दिन तू टूटा-सा लगे,
खुद से भी रूठा-सा लगे,
तो उस ताबीज़ को पकड़कर
बस एक बार माँ को याद कर लेना।
न जाने कितनी बार
तेरी खामोशियों पर उसने
मंत्र पढ़े हैं उस धागे पर,
कि तेरी साँसों को
कोई भी तकलीफ छू न पाए।
वो ताबीज़ अब भी कहता है –
"बेटा, गिर मत जाना,
मैं हूँ न, तेरी माँ की तरह
तेरे साथ हर दहलीज़ पर।"
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