गाँव का इश्क़ कविता PADHE EK KHAAS ANDAJ ME । Bachpan ki best kavita
गाँव का इश्क़
Bachpan ki best kavita
न चॉकलेट था, न फूल थे,
बस एक नज़र थी…
जो सब कुछ कह गई थी।
वो इश्क़, जो मिट्टी की खुशबू में पलता था,
पगडंडी की धूल पर मुस्कुराता था,
कुएँ के पानी में झाँकता था —
आज शहर की भीड़ में तन्हा भटकता है।
भीड़ के शोर में वो नज़र कहीं खो गई,
चाँदनी रातों की वो धीमी बात कहीं खो गई।
अब दिल के किसी कोने में
एक पुराना गाँव साँस लेता है,
और हर साँस के साथ
थोड़ा और टूट जाता है…
वो गाँव का इश्क़,
आज भी अधूरा है,
आज भी दर्द में ज़िंदा है।

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