दिल को आनंद से भर देने वाला "बेरोज़गार फूफा जी" की कविता आवश्य पढ़ें हिन्दी में
"बेरोज़गार फूफा जी"
फूफा जी हैं बेरोज़गार,
पर attitude वाला परिवार!
बोले — "नौकरी तो इज्ज़त घटाती है,
हम तो शेर हैं, पिंजरे में नहीं आते हैं!" 🦁
सुबह 10 बजे उठते हैं,
मुंह धोकर अख़बार फटकारते हैं।
बोले — "अब भी छपी नहीं मेरी नौकरी की खबर,
लगता है सरकार मुझसे डरती है अब हरबर!" 😤
भांजे ने पूछा — "फूफा जी, करते क्या हो?"
बोले — "बेटा, सोचते हैं गहराई में,
देश की नीतियाँ समझते हैं परछाई में!"
हर हफ्ते नया सपना बनाते,
कभी पुलिस, कभी कलेक्टर बन जाते।
कभी बोले — "अब तो YouTuber बन जाऊँगा!"
बीच में बोले — "नहीं नहीं, बाबा बन जाऊँगा!" 😵💫
बेरोज़गारी का ऐसा जलवा है उनका,
सासू माँ भी रोज़ पूछें —
"बेटा कुछ काम-धंधा?"
तो वो बोले —
"माँ जी… अभी आत्मनिर्भर बनने की प्रक्रिया में हूँ!"
शादी में गए तो सूट बड़ा भारी था,
गिफ्ट में लाए थे एक पुरानी डायरी और चाय की प्याली,
बोले — "हम देने में नहीं,
सोचने में विश्वास रखते हैं — वैचारिक तोहफा है ये खाली!" 😅
राजू, बात सीधी है ये समझ ले,
फूफा जी की बेरोजगारी अब एक मिशन है,
और उन्होंने खुद ही ऐलान कर दिया है —
"अब जो काम करेगा, वही फूफा कहलाने लायक नहीं रहेगा!" 😎
नोट: अगर आपको ये कविता पसंद आई हो तो
कमेंट करें और दोस्तो को शेयर करें , अगर आपको कोई विषय पर कविता बनवानी हो तो वो भी बेझिझक बताएं
आपका
_राकेश प्रजापति

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