Attitude-Kavita । चले आते हैं मुँह उठाकर,और चले जाते हैं सर झुकाकर,
दमदार एटीट्यूड शायरी: “चले आते हैं मुँह उठाकर और चले जाते हैं सर झुकाकर” जैसी तंज़ भरी हिंदी शायरी पढ़ें और शेयर करें।
चले आते हैं मुँह उठाकर,
और चले जाते हैं सर झुकाकर,
दांत निपोरते हैं और
चले जाते हैं खीसें निकालकर।
हम भी नवाब हैं अपने अंदाज़ के,
फर्क बस इतना है, हम सीधे बोलते हैं।
जो सामने मीठा बने,
पीछे ज़हर घोलते हैं।
ऐसे लोगों से दूरी ही बेहतर,
क्योंकि ये वक्त पर रंग बदलते हैं।
हम तो वही रहते हैं,
जो दिल में है वही कहते हैं।
हमारी खामोशी को कमजोरी मत समझ,
हम जवाब देना भी जानते हैं।
जो हमें नीचा दिखाने चले,
उसे उसकी औकात बताना भी जानते हैं।
हमसे जलने वालों की कमी नहीं,
पर हम पर मरने वाले भी हजार हैं।
जो पीठ पीछे हँसे,
सामने आने की हिम्मत नहीं रखते यार।
चले आते हैं मुँह उठाकर,
और चले जाते हैं सर झुकाकर,
दांत निपोरते हैं और
चले जाते हैं खीसें निकालकर।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें