Romantic दिल्ली की शायरी कॉम्बो खास शायरी
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दिल्ली है दिल वालों की
ऐसी लगती तो नहीं,
जैसा चाहे वैसी कोई
मिलती तो नहीं।
हर मोड़ पर है रौनक सी,
पर वो अपनी सी तो नहीं,
हर आंख में है चाहत सी,
पर वो सच्ची तो नहीं।
कभी बारिशों में भीगी थी,
पर वो यादें धुलती तो नहीं,
कभी चुपचाप देखा था,
पर बात वो खुलती तो नहीं।
दिल्ली है दिल वालों की,
ऐसी लगती तो नहीं,
जैसा चाहे वैसी कोई
मिलती तो नहीं।
हज़ारों चेहरे हैं इस शहर में,
मगर वो तेरे जैसी चमक
किसी में दिखती तो नहीं।
हवा भी चलती है नाम तेरा लेकर,
पर वो ताज़गी तेरी साँसों सी
महकती तो नहीं।
कभी इंडिया गेट, कभी हौज़ खास की रातें,
पर तेरी बाहों सी
ये दिल्ली भी लगती तो नहीं।
तेरी हँसी का जादू है ऐसा,
कि चाँद भी सामने आकर
कुछ कहता तो नहीं।
तू जो साथ हो, तो भीड़ भी सुकून है,
वरना ये दिल्ली
कभी अपनापन देती तो नही
दिल्ली की गलियों में ढूंढा तुझको,
पर वो बात अब मिलती तो नहीं,
दिल से जो निकली थी एक दुआ,
वो तुझ तक पहुंचती तो नहीं।
दिल्ली है दिल वालों की
ऐसी लगती तो नहीं.........

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