LOVE AND JOB BOTH IMCOMPLETE "मुहब्बत और नौकरी" — दोनों अधूरी" PADHE BEST कविता
"मुहब्बत और नौकरी — दोनों अधूरी"
दोनों ही रिश्ते,
एक दिल से जुड़ा...
दूसरा पेट से।
मुहब्बत अधूरी छूट गई,
नौकरी अधूरी निभ रही है,
जिसे थामना चाहा था दिल से,
वो उँगलियों से फिसल रही है।
वो कहती थी – "तू वक़्त नहीं देता",
और बॉस कहता है – "तू टाइम पर क्यों नहीं आता?"
एक ने दिल माँगा था,
दूसरा खून चूस रहा है तनख्वाह के साथ।
मैं कॉफी पीता हूं मशीन वाली,
और यादें आती हैं उसकी – अदरक वाली। ☕💔
Love letter की जगह अब email है,
जहाँ “Missing you” नहीं, “Please review” लिखा मेल है।
शामें जो पहले उसके कॉल से सजती थीं,
अब मीटिंग्स और Target से भर जाती हैं।
न वो रही, न weekend की शाम,
बस reminder है – "Submit by 5 PM sharp."
एक वादा था – साथ जीने का,
दूसरा offer letter था – दो साल की बॉन्ड का।
दोनों ने बाँध लिया था मुझे,
पर दोनों ने छोड़ा भी बड़ी ख़ामोशी से।
अब मुहब्बत सिर्फ स्टेटस में "Single" है,
और नौकरी – “Probation Period” में।
ना इधर भरोसा मिलता है,
ना उधर जवाब आता है।
मुहब्बत भी सैलरी जैसी निकली,
Expectation बड़ी… पर Increase ना के बराबर।
"Resign करने का मन है, पर लोन बाकी है",
"वो शादी कर गई… और मैं HR से छुट्टी मांगता रह गया"
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