मोहब्बत और टूटते ख्वाब BAHUT HI SADDY SADDY DHARD BHARI SHARYI कविता PADHE
मोहब्बत और टूटते ख्वाब वो शाम अब भी दिल में ठहरी है, जहां तेरा हाथ छूकर भी फिसल गया था, मोहब्बत अधूरी थी शायद, या किस्मत का सफर बदल गया था। तेरे ख्वाब हर रात आँखों में आते हैं, पर सुबह होते ही टूट जाते हैं, जैसे शीशे पर जमी ओस की बूंदें, जो धूप से पहले ही मिट जाते हैं। तेरी हँसी की गूंज अब भी बाकी है, कमरे की दीवारों से टकराती है, हर लम्हा एक सवाल सा लगता है, कि क्यों अधूरा इश्क मुकम्मल कहलाता है? हमने तो चाँद मांगा था सिर्फ़ एक रात को, पर तू तो सितारों को लेकर चली गई, मेरे हिस्से में रह गया बस अंधेरा, और कुछ टूटे हुए ख़्वाबों की रोशनी। तेरी यादों का साया अब भी चलता है, हर राह पे, हर मोड़ पे रुकता है। तेरे बिना सन्नाटा भी शोर करता है, दिल की हर धड़कन तेरा नाम पढ़ता है। तू दूर होकर भी पास-सी लगती है, तेरी कमी हर साँस में चुभती है। वो खत, वो तस्वीरें सब संभाले हुए हैं, जैसे बिखरे पन्नों में अधूरे किस्से हुए हैं। अब तन्हाई ही मेरा हमसफ़र बन गई, तेरे जाने के बाद ज़िंदगी अधूरी रह गई। अब भी कभी तेरी बात छिड़ती है, तो दिल मुस्कुराकर भीग जाता है, क्योंकि कुछ मोहब्बतें किताबों मे...